मै भागता हु इन परछाइयों के पीछे के जैसे
खींचती हो मेरा दामन छिपकर मेरी तन्हाईयाँ
मै जितना दूर जाता हूँ ये उतनी पास आती है
बड़ी बेशर्म सी लगने लगी है अब मुझे तन्हाईयाँ
ठिठक जाती है रस्ते में दौड़ती धुप से डरकर
कभी बेख़ौफ़ दरवाजे से घुस जाती के हो पुरवइया
मै इसका ग़म करू के साथ मेरे है नही कोई
करू फिर जशन इसका साथ मेरे है मेरी तन्हाईयाँ
मेरे कातिल का न मालूम के मै रह गया ज़िंदा
मिटा डाला मेरे पीछे यहाँ तक के मेरी परछाईया
के अब ज़िंदा भी हूँ तो ज़िंदगी पे सोग आता है
फिर से वही दामने कफ़स, फिर से वही तन्हाईयाँ
उजालो में ठहरने की मेरी आदत न रही अब
बहुत ही ज्यादा डराने है लगी मुझको मेरी परछाईया
चले इस शहरे शय को छोड़ कर अब ए मेरे हमदम
चले उस जानिबे शहर जहा रहती है तन्हाईयाँ
मेरे ज़ेहन में किसी खराश सा वो घूमता रहा
परछाइयों सा चलता रहा बनकर मेरी बदनामियाँ
चाँद मुस्कुराता रहा फलक पे तमाशबी की तरह
ज़मी पे करती रही बेहद परेशा मुझे तन्हाईयाँ
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